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Friday, May 29, 2020

अपने से SEO केसे करे ओर अपने ब्लॉग का TRAFFIC केसे बढ़ाये

Seo कैसे करे और अपने ब्लॉग की ट्रैफिक बढ़ाये?

एक beginner जो नया नया blogging कर रहा है वो ये जरुर जानना चाहेगा के seo कैसे करे या फिर अपने blog को search engine optimization friendly कैसे बनाये. इस चीज़ को मैं रोज देख रहा हूँ के सब इसी चीज़ के पीछे भाग रहे है. लेकिन उससे पहले आपको अपने seo basics को clear करना होगा.


एक चीज़ मैंने देखा की जब भी हमें कुछ चीज़ के विषय में कुछ जानना होता है तब हम Google का इस्तमाल करते हैं उसके विषय में जानने के लिए. वहीँ seek करने पर हमें लाखों की मात्रा में effects दिखाई पड़ते हैं लेकिन उनमें से जो सबसे बेहतर होते हैं वो ही seek Engine के पहले स्थान पाते हैं.

अब सवाल उठता है की Google या कोई दूसरा seek engine को कैसे पता चलता है की इस content material में उचित जवाब है जिससे की इसे सबसे पहले में रखना चाहिए. बस यहीं पर ही seo का concept आता है. यही search engine optimization (seo) ही है को की आपके web page के pages को Google में rank करवाता है.

अब यदि ऐसी बात है तब यह search engine optimization को कैसे करें ? इसका मतलब की seo को कैसे किया जाता है जिससे की हम अपने blog के articles को Google के पहले web page में rank करवा सकें.

यदि आपके मन में भी seo क्या है और seo कैसे करें से सम्बंधित कुछ भी सवाल हैं तब आज का यह लेख आपके लिए काफी जानकारी भरा होने वाला है. इसलिए हमारे साथ अंत तक बने रहे और search engine optimization के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त करें. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

Seo क्या है

Seo का full shape होता है seo. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका इस्तमाल कर आप अपने weblog का articles का rank search engine में improve करा सकते हैं.

Google अपने search outcomes में उन hyperlinks को show करता है जिन्हें की वो consider करता है अच्छे content वाले हैं और उनमें ज्यादा authority होती है बाकियों की तुलना में.

Authority का मतलब है की उस top page के link से कितने और pages जुड़े हुए हैं. जितनी ज्यादा pages उससे जुडी होंगी उतनी ज्यादा उस page की authority भी होगी.

Search engine optimization का मुख्य काम ही होता है किसी भी emblem की visibility को बढ़ाये natural search effects में. इससे आसानी से वो logo को एक अच्छा publicity प्राप्त होता है, साथ में उसके article search engines like google में ऊपर rank होते हैं. जिससे ज्यादा site visitors उनकेओर आते हैं जिससे ज्यादा conversions होने के chances बढ़ जाते हैं.

Search Engine ये कैसे पता करते हैं की किस page को rank किया जाये ?

Serps का बस एक ही उद्देश्य होता है. उनका उद्देश्य होता है users को उनके सवाल के सबसे बेहतर जवाब दिया जाये.

जब भी आप उन्हें इस्तमाल करते हैं, उनकी algorithms वही pages का चुनाव करते हैं जो की आपके सवाल के ज्यादा applicable हो. और फिर वो उसे rank करते हैं, बाद में उन्हें pinnacle के pages में display किया जाता है.

Users के लिए सही facts का चुनाव करने के लिए. Serps मुख्य रूप से दो चीज़ों को ज्यादा examine करते हैं:

ये दो चीज़ें हैं,

पहला है search question और page की content material के बीच क्या Relevancy है.

वहीँ दूसरा है page की Authority कितनी है.

Relevancy के लिए search engine इन्हें get right of entry to करता है दुसरे elements से जैसे की subjects या keywords.

वहीँ Authority को degree किया जाता है website के reputation के हिसाब से. Google ये अनुमान करता है की जितना ज्यादा कोई page या aid होगा net पर तब उसमें उतने ही ज्यादा अच्छे content material भी होंगे readers के लिए.

वहीँ ये सभी चीज़ों को analyze करने के लिए ये search engines complicated equations का इस्तमाल करते हैं जिन्हें की seek Algorithms कहा जाता है.

Serps हमेशा चाहते हैं की उनके algorithms को वो secret ही रखें. लेकिन समय के साथ साथ SEOs ने कुछ ऐसे ही ranking elements के विषय में जान लिया है जिससे की आप किसी page को search engine में rank करा सकें.

इन्ही pointers को seo method भी कहा जाता है. जिनका इस्तमाल कर आप अपने article को rank करा सकते हैं.

Seo कैसे करे



यदि आपको ये सीखना है की seo कैसे करें तब इससे पहले आपको search engine optimization के अलग अलग प्रकार के विषय में जानना होगा. कहीं तब जाकर आप इन्हें सही ढंग से करने में सक्षम बन सकते हैं.

Seo कितने प्रकार के हैं ?

वैसे search engine optimization के बहुत से प्रकार हैं, लेकिन उनमें से भी मुख्य रूप से तीन प्रकार को ज्यादा महत्व दिया जाता है.

On page seo

Off web page seo

Technical seo

On-page optimization:

इस प्रकार के optimization में page के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. ये optimization करना पूरी तरह से हमारे control में होता है. इसके अंतर्गत कुछ चीज़ें आती हैं जैसे की A) incredible, keyword-wealthy content को तैयार करना. B) साथ ही HTML को Optimize करना, जिसके अंतर्गत identify tags, meta descriptions, और subheads इत्यादि आते हैं.

Off-page optimization:

इस प्रकार का optimization page के बाहर ही किया जाता है. इसके अंतर्गत कुछ चीज़ें आती हैं जैसे की again-hyperlinks, page ranks, bounce fees इत्यादि.

Technical search engine optimization:

ये उन factors को कहा जाता है जो की website के technical aspects पर असर डालती है. जैसे की web page load speed, navigable sitemap, AMP, cell screen dispaly इत्यादि. इन्हें ठीक तरीके से optimized करना बहुत ही आवश्यक होता है क्यूंकि ये आपके web page ratings पर भी असर डालते हैं.

On page search engine optimization कैसे करे

On-web page factors उन elements को कहा जाता है जो की आपके internet site के elements से जुड़े हुए होते हैं. On-page factors के अंतर्गत technical set-up – आपके code की quality – textual और visible content material, साथ ही आपके site की user-friendliness भी शामिल हैं.

हमें ये समझना चाहिए की on-page strategies वो होते हैं जिन्हें की internet site में put into effect किया जाता है internet site की performance और visibility को बढ़ाने के लिए.

चलिए अब कुछ ऐसे ही on-web page techniques के विषय में जानते हैं : –

1. Meta name: ये आपकी internet site को describe करता है primary key phrases की मदद से और ये fifty five–60 characters के बीच ही होने चाहिए, क्यूंकि इससे ज्यादा हुए तब ये Google search में hide हो सकते हैं.

2. Meta Description: ये internet site को outline करने में मदद करती है. Website के प्रत्येक web page की एक unique meta descriptions होनी चाहिए. जो की sitelinks की मदद करता है उन्हें routinely engines like google में show करने के लिए.

Three. image Alt Tags: प्रत्येक internet site में pics तो होते ही हैं लेकिन google इन्हें समझ नहीं पाता है इसलिए photograph के साथ हमें एक alternative text भी प्रदान करना चाहिए जिससे की search engine भी इन्हें आसानी से समझ सके.

4. Header Tags: ये बहुत ही जरुरी होते हैं, साथ में पुरे page को सही ढंग से categorize करने के लिए इनका बड़ा योगदान होता है. H1, H2 इत्यादि.

5. Sitemap: Sitemap का इस्तमाल internet site pages में crawl कराने के लिए होता है जिससे की google spider आसानी से आपके pages को crawl कर उन्हें index कर सकें. बहुत से अलग अलग sitemaps होते हैं जैसे की sitemap.Xml, sitemap.Html, ror.Xml, information sitemap, films sitemap, picture sitemap, urllist.Txt इत्यादि.

6. Robots.Txt: ये बहुत ही जरुरी होता है आपके internet site को Google में index कराने के लिए. जिन websites में robotic.Txt होती है वो जल्द ही index हो जाते हैं.

7. internal Linking: Interlinking बहुत ही जरुरी होतो है website में आसानी से navigate करने के लिए pages के बीच.

Eight. Anchor text: आपकी anchor text और url दोनों एक दुसरे के साथ suit होने चाहिए, इससे rank करने में आसानी होती है.

9. Url shape: आपके website की url structure ठीक होनी चाहिए, साथ में ये seo-friendly भी होनी चाहिए जिससे की इन्हें without difficulty rank कराया जा सके. साथ में प्रत्येक url में एक targeted keyword होनी चाहिए, इसका मतलब की आपकी आपके url के साथ suit करनी चाहिए.

10. cell-pleasant: कोशिश करें अपने internet site को cell-pleasant बनाने के लिए क्यूंकि आजकल प्राय लोग mobile का इस्तमाल करते हैं net इस्तमाल करने के लिए.

Off web page search engine optimization कैसे करे

वहीँ दूसरी ओर आती है off-page factors, जैसे की दुसरे websites से hyperlinks, social media की interest और दुसरे advertising sports जो की आपके internet site से अलग हो. इसमें आप excellent back links के उपाय ज्यादा देना होता है, जिससे की आप अपने website के authority को बढ़ा सकें.

एक बात आपको यहाँ समझना होगा की off-page का मतलब केवल hyperlink building नहीं होता है बल्कि इसके साथ ये sparkling content पर भी जोर देता है, जितना ज्यादा और बढिया content आप अपने viewers को प्रदान करेंगे उतनी ही ज्यादा आपके website को Google भी पसंद करेंगा..

Content material:
यदि आपके internet site में ज्यादा clean content होंगे तब ये Google को ज्यादा allow करगे हमेशा आपके internet site को crawl करने के लिए sparkling content के लिए. साथ में आपके content significant भी होने चाहिए जिससे की ये आपके target market को सही fee प्रदान कर सकें.

Key phrases:
सही keywords का चयन बहुत ही जरुरी होता है search engines like google and yahoo में rank करने के लिए. इसके आपको इन keywords को content material के साथ optimize करना चाहिए जिससे की keyword stuffing का खतरा न हो और आपके articles सभी rank हो जाएँ.

Long-tail:
जब बात keywords की आती है तब हम lengthy tail key phrases को कैसे भूल सकते हैं. चूँकि short keyword में rank करा पाना इतना आसान नहीं होता है इसलिए इसके जगह में आप lengthy tail keywords का इस्तमाल कर सकते हैं, जिससे इन्हें rank कराने में आसानी हो.

LSI:
LSI keywords वो होते हैं जो की main key phrases से बहुत ही ज्यादा similar होते हैं. इस्लिएय अगर आप इन LSI key phrases का इस्तमाल करेंगे तब visitors आसानी से आपके content material तक पहुँच सकते हैं जब वो कोई precise key-word को seek कर रहे हों तब.

Brokenlinks:
इन links को यथा संभव निकाल फेकना चाहिए. अन्यथा ये एक ख़राब affect प्रदान करता है.

Visitor running a blog:
यह एक बहुत ही बढ़िया तरीका है do-follow one way links बनाने का. इससे दोनों ही ब्लोग्गेर्स को फयेदा प्राप्त होता है.

Infographics:
इससे आप अपने visitors को अपने content visually display कर सकते हैं जिससे उन्हें ज्यादा समझ में आता है. साथ में वो इन्हें share भी कर सकते हैं.

End

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख search engine optimization कैसे करे जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को seo के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये 

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